सोमवार, 30 मई 2011

तेलीबांधा प्रोजेक्ट पर तलवार


                रायपुर.नगर निगम के ड्रीम प्रोजेक्ट तेलीबांधा में 5 मकानों को खाली कराकर जमींदोज करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा। अदालती आदेश मकान मालिकों के हक में आने के बाद निगम का पूरा प्रोजेक्ट ही लंबित हो जाएगा। 
             निगम इस कवायद में था कि एक साल के भीतर प्रोजेक्ट के 720 मकान बनाकर बोरियाकला में विस्थापितों को पुनर्वासित कर दिया जाए। मगर हाईकोर्ट से मिले स्टे के बाद प्रोजेक्ट साल भर के अंदर किसी भी हालत में पूरा नहीं हो सकता है। ये पांचों मकान प्रोजेक्ट के बीचोबीच अवरोध बनकर खड़े रहेंगे।              तत्कालीन कमिश्नर ओपी चौधरी ने राजीव आश्रय योजना के पट्टों को निरस्त करने के लिए दो महीने पहले ही जिला प्रशासन को पूरा प्लान बनाकर दे दिया था। मगर पट्टे 4 अप्रैल के आसपास ही निरस्त हो सके। जिला प्रशासन ने आनन-फानन में 160 पट्टों को निरस्त किया। मगर नजूल के स्थाई पट्टों को निरस्त करने में जिला प्रशासन से चूक हो गई। अफसरों का कहना है कि पांचों मकान मालिकों को 30 साल की स्थायी लीज मिली हुई थी। स्थायी लीज होने के कारण कलेक्टर भी इन्हें निरस्त नहीं कर सके। कानून के जानकारों के मुताबिक दो ही स्थिति में निगम पट्टों को निरस्त करा सकता है। 
                पहला आपसी सहमति के बाद मुआवजा दे दिया जाए या फिर पांचों मकान मालिकों का उचित विस्थापन किया जाए।

तालाब के अंदर के पट्टे कैसे मिले - 
तेलीबांधा में झुग्गी झोपड़ी तोड़ने के बाद अफसर इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर तालाब के पानी के अंदर बनी झोपड़ियों के पट्टे कैसे दे दिए गए। जिस वक्त पट्टे दिए गए उसकी अगर जांच की जाए तो बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है।

बिना अनुमति बना लिए भवन - 
तेलीबांधा के आसपास बनी झुग्गी झोपड़ी वालों ने शानदार व आलीशान मकान केवल पट्टे खरीदकर ही बना लिए। अधिकांश केस में निगम से किसी भी का मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया। जितने भी मकान तोड़े गए उसमें से किसी ने भी मकान बनाने की अनुमति नहीं ली थी।

प्रोजेक्ट में थे दो तरह के पट्टे  - 
कलेक्टर डा. रोहित यादव ने बताया कि नगर निगम ने तेलीबांधा की झुग्गी झोपड़ी के व्यवस्थापन को राजीव आश्रय योजना में लिया था। उसके तहत 160 पट्टों को निरस्त करने की लिस्ट बनाकर दी गई थी। मगर इसके अलावा भी कुछ पट्टे नजूल लैंड की फ्री होल्ड पर थी। 
          इसका 30 साल का स्थाई पट्टा था। पट्टा धारी बाकायदा भू-भाटक भी देता रहा है। आपसी सहमति व मुआवजे के बाद ही इन पट्टों को निरस्त किया जा सकता था। वो अधिकार क्षेत्र के बाहर था। इसलिए पट्टे निरस्त नहीं किए गए।
          "कोर्ट के निर्णय के बाद ही पांच मकानों पर निर्णय लिया जाएगा। पांच मकानों को छोड़ दिया गया है। बाकी सभी मकानों को खाली कराकर तोड़ा जा रहा है।" 
तारण सिन्हा, अतिरिक्त कमिश्नर 


केविएट के बाद भी स्थाई पट्टे पर - "स्टे इसलिए मिला क्योंकि इन्हें निरस्त नहीं किया गया। प्रोजेक्ट से पहले अगर इन्हें निरस्त कर दिया जाता तो स्टे नहीं हो पाता।" 
पंकज अग्रवाल, 



वकील तय नहीं कर पा रहे क्या-क्या करेंगे - तेलीबांधा प्रोजेक्ट के तहत पूरी बस्ती को जमींदोज कर करने के बाद भी निगम इस प्रोजेक्ट का फूल प्रूफ प्लान नहीं बना सका है। हर दूसरे दिन कोई न कोई नई योजना की घोषणा की जा रही है। यानी अब तक तय नहीं हुआ है कि प्रोजेक्ट किस स्वरूप में आकार लेगा, जबकि 650 परिवारों का आशियाना उजड़ चुका है।

              शुक्रवार को निगम ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट में तालाब के आकार को शामिल कर लिया। पांच दिन की तोडफ़ोड़ के बाद यह घोषणा की गई कि तालाब को दिल के आकार का शेप दिया जाएगा। ऊंची मंजिल से देखने पर वह दिल का नमूना नजर आएगा। 
              तालाब को इस नए शेप में ढालने के लिए जीई रोड वाले तालाब के किनारे स्थित आरडीए के कांप्लेक्स और पिंड बलूची रेस्टोरेंट को भी तोड़ा जाएगा। इन भवनों को तोड़ने के बाद खाली होने वाली जमीन तालाब में शामिल की जाएगी। अभी तक यह निगम के प्लान में नहीं था। इसी तरह तालाब के एक हिस्से में स्थित नेत्र चिकित्सालय के गार्डन का हिस्सा भी प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया जाएगा।


तालाब का पार बढ़ेगा - तेलीबांधा प्रोजेक्ट बनने के बाद तालाब का पार बढ़ जाएगा। तालाब 16 हेक्टेयर में था। इसमें से अभी तालाब का पानी 11 हेक्टेयर में बचा है। अतिक्रमण हटने के बाद 5 हेक्टेयर की जमीन 

खाली कराई गई है। 4 हेक्टेयर की जमीन यानी 10 एकड़ के लगभग जमीन पर प्रोजेक्ट को लाया जा रहा है। खाली हो रही जमीन में से ढाई से तीन एकड़ तालाब बढ़ जाएगा। 

          12 हेक्टेयर वाटर बाडी के बाद रिटेनिंग वाल बनाई जाएगी। 4 हेक्टेयर के हिस्से में तीन किमी का पाथ वे, गार्डन, पार्किग स्पेस, फूड जोन, कामर्शियल कांप्लेक्स, सामुदायिक भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व मंदिर बनाने का प्लान है।


वर्क आर्डर में देरी - बस्ती खाली होने के बाद वर्क आर्डर जारी किया जाना था। मगर प्लान तैयार नहीं हुआ है इसलिए वर्क आर्डर जारी करने में काफी देरी होने के संकेत मिल रहे हैं।



वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट- तालाब के किनारे वाले हिस्सों में वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट भी बनाया जाएगा। साथ ही तालाब के अंदर की मिट्टी को निकालकर गहरीकरण भी किया जाएगा। इसके लिए 12 करोड़ रुपए का अलग से प्रावधान किया गया है।

             "तालाब को दिल का आकार देने की कोशिश है। पाथ वे 3 किमी का बनाया जाएगा। जल विहार कालोनी के दोनों गार्डनों को पाथ वे से जोड़ दिया जाएगा। प्रोजेक्ट को सही स्वरूप देने के लिए जीई रोड के कुछ  हिस्सों में भी तोडफ़ोड़ की जाएगी।"  
किरणमयी नायक, महापौर


प्रोजेक्ट कास्ट- 24 करोड़ 36 लाख 

>टेंडर कास्ट 24 करोड़ 35 लाख। 
>एक मकान की कीमत- तीन लाख 36 हजार। 
>अधोसंरचना मद में सड़क, पानी, बिजली व ओवरहेड टैंक के पीछे एक मकान पर 70 हजार होंगे खर्च। 
>एक मकान बनेगा 2 लाख 64 हजार में। 
>ओमनी इंफ्रास्ट्रक्चर व सीनटेक्स ने डाला था टेंडर। 
>ओमनी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला टेंडर। 
>दोनों कांट्रेक्ट में था एक करोड़ का अंतर। 
>चार बार हुआ टेंडर का नेगोशियेशन 

सौजन्य - दैनिक भास्कर, रायपुर 

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