सोमवार, 28 नवंबर 2011

तेलीबांधा तालाब की नए सिरे से नाप-जोख

रायपुर। तेलीबांधा तालाब की अब नए सिरे से नापजोख होगी। रेवेन्यू अफसरों से वर्तमान रकबे का पूरा सीमांकन करने के बाद पूरी जानकारी देने को कहा गया है। पुराने रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार तालाब 35 एकड़ में था। अब इसके आधे से कम हिस्से में ही तालाब बचा है।

कलेक्टर डा. रोहित यादव ने एसडीएम तारन प्रकाश सिन्हा से इलाके के सारे पटवारियों को तालाब के पूरे रकबे की मौके पर जाकर लैंड रिकार्ड के साथ जांच करवाने के आदेश दे दिए हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट दो दिन के अंदर तैयार करने को कहा है। अफसरों से यह भी कहा गया है कि वे अपने साथ पुराने लैंड रिकार्ड की कापी लेकर जाएं। उस आधार पर वर्तमान में तालाब के पानी की जमीन, निस्तारी की जमीन और बची घास जमीन की पूरी जानकारी तैयार करें। नापजोख के सारे रिकार्ड की जानकारी तैयार होने के बाद ही निगम के द्वारा मांगी जा रही जमीन पर निर्णय होगा। उल्लेखनीय है कि तेलीबांधा तालाब सौंदर्यीकरण और इनसीटू प्रोजेक्ट के तहत तालाब के किनारे बनने वाले मकानों के लिए रेवेन्यू डिपार्टमेंट से जमीन का अलाटमेंट नगर निगम को होना है।




ये वही जमीन है जहां से छह महीने पहले तेलीबांधा बस्ती को बोरियाकला में शिफ्ट कराने के बाद खाली कराया गया। 12 एकड़ की वाटर बाडी के बाद खाली कराई गई बस्ती में से 6 एकड़ जमीन निकली है। इसमें से 2 एकड़ जमीन निगम मकान बनाने के लिए मांग रहा है। मगर जनवरी 2011 के जगपाल सिंह वर्सेस स्टेट आफ पंजाब के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए गए निर्देश के बाद तालाब के पानी और निस्तार की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण न करने के निर्देश दिए गए थे। उसके बाद से ही तेलीबांधा तालाब सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट पर प्रश्न चिन्ह लगना शुरू हुआ।



निर्णय आने के बाद खाली हुई बस्ती : गौर करने वाली बात यह है कि जगपाल सिंह वर्सेस स्टेट आफ पंजाब का फैसला जनवरी में आ गया था। इसके तत्काल बाद राज्य शासन को तालाब की जमीन पर निर्माण नहीं करने के निर्देश भी दे दिए गए। मगर राज्य शासन और निगम प्रशासन ने अप्रैल के अंत में तेलीबांधा बस्ती के लोगों के पट्टों को निरस्त करके उन्हें इस वादे के साथ बोरियाकला शिफ्ट किया कि उन्हें दोबारा तालाब के किनारे खाली हुई जमीन पर ही मकान बनाकर दिए जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि जब शासन व प्रशासन को इस बात का पता था कि खाली होने वाली जमीन पर मकान नहीं बनाए जा सकते तो बस्ती वालों के साथ लिखित में करार किस आधार पर किया गया।



साढ़े चौबीस करोड़ के मकान : तेलीबांधा तालाब के किनारे बनने वाले राज्य के पहले इनसीटू प्रोजेक्ट के तहत कुल 720 मकान बनाए जाने हैं। ये मकान 24 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपए की लागत से बनने हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 80 फीसदी, राज्य सरकार ने दस फीसदी और नगर निगम ने दस फीसदी राशि अलाट की है। बनने वाले एक मकान की लागत 3 लाख 39 हजार रुपए आ रही है। इसका दस फीसदी हिस्सा मकान बनने के बाद बस्ती वालों से लिया जाना है। ये दस फीसदी हिस्से का शेयर नगर निगम मकान निर्माण के पहले लगा रहा है। 



तालाब का कुल रकबा 35 एकड़ से ज्यादा



> 1929-30 के लैंड रिकार्ड के मुताबिक तालाब का कुल रकबा 35 एकड़ से ज्यादा। 
> उस लैंड रिकार्ड के मुताबिक जीई रोड की गौरवपथ की सड़क भी तालाब की जमीन। 
> जलविहार कालोनी की सड़क, गार्डन, आरडीए कांप्लेक्स और लायंस क्लब का हाल भी पानी के अंदर की जमीन पर बना है। 
> वर्तमान में केवल 12 एकड़ हिस्से में वाटर बाडी बची है। 
> बस्ती को खाली कराने के बाद 6 एकड़ की अतिरिक्त जमीन निकली। 
> चार एकड़ जमीन में तालाब की वाटर बाडी को बढ़ाने की योजना। 
> 2 एकड़ जमीन पर सौंदर्यीकरण और मकान बनाने की योजना।



तेलीबांधा तालाब का नए सिरे से नापजोख कराया जा रहा है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट से कहा गया है कि इलाके के सारे पटवारी और आरआई को नापजोख में लगा दिया जाए। उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रोहित यादव, कलेक्टर

रविवार, 7 अगस्त 2011

नोट के बदले वोट


मैं आफिस जाने ही वाला था तभी अचानक से तेज बारिश शुरू हो गई। फिर क्या था घरवाले आफिस जाने के लिए मना करने लगे। मुझे आफिस में आवश्यक कार्य था, न्यूज पेपर प्रिटिंग में भेजना था। सारी तैयारिंया हो गई थी। बस फाइनल टच बचा था। मैं आफिस जाने के लिए परेशान था। मगर घरवालें बोरियाकला से रायपुर लगभग 13 कि.मी. जाने के लिए मना कर रहे थे। जैसे-जैसे समय व्यतित होता गया वैसे-वैसे पानी कम होने की जगह तेज होता गया मेरी परेशानी और बढ़ने लगी।
मेरी परेशानी देखकर घरवाले मेरे बरसाती ढूंढने लगें। बहुत ढूंढने पर भी बरसाती नही मिला। शायद घर शिफ्टिंग के वक्त कहीं खो गया होगा। इसी तरह से मेरे यहां की 2 कुर्सी और बहुत से लोगों का सामान भी चोरी हो गया था। पर क्या कर सकतें है जो हो गया, सो हो गया।
घर पर सभी एक साथ बैठकर बरसात का मजा ले रहे थें। बरखा (मेरी पत्नी) ने पकोड़े बनाया। उसे खाते-खाते हम सभी बातें करने लगें और हमें रायपुर हमारी बस्ती जलविहार कालोनी की याद आ गईं। तालाब किनारे और नीचली बस्ती होने के कारण। थोड़े से बरसात होने पर ही बस्ती भरने लग जाती थी। हमारा घर आगे होने के कारण बच जाता था। लेकिन कच्चा, खपरे का घर होने के कारण हमें भी परेशानी होती थी। दिन मे तो चल जाता था। परन्तु आधी रात जब हम गहरी नींद पर होते थे। अचानक बरसात होने पर घर पर पानी टपकने से नींद खुल जाती थी। धीरे-धीरे हम सभी को इसकी आदत हो चुकी थी। फिर जब कभी आधी रात को बरसात होती तो हम उठकर तुरंत पानी टपकने वाली जगह पर कहीं बाल्टी, तो कहीं मग, तो कहीं गंजी रख देते थे और एक तरफ बैठकर बस भगवान से यही प्रार्थना करते की यह बरसात कब रूकेगीं। थोड़े ही देर पर देखते ही देखते पानी अधिक होने से घरों में भरना चालु हो जाता था और दौड़भाग की आवाज आनी शुरू हो जाती थी।
पानी भरते ही हमारे बस्ती के नौजवानसाथियों के साथ मिलकर मैं सभी डुबे हुए घरों से सामान निकालना, कभी टीवी तो कभी पलंग तो कभी किसी बच्चें को तो कभी किसी बुजुर्ग को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम करते। हमें मजा भी आता था, तो गुस्सा भी। (कभी भगवान को कोसते तो कभी प्रार्थना करते) धीरे-धीरे सभी की आदत बन चुकी थी। अब कोई किसी से शिकायत नहीं करता और ना ही भगवान को कोसता। मानसून मौसम के शुरू होते ही सभी अपने-अपने सामानों को सुरक्षित स्थान पर पहले ही रख लेते थे।
बस्ती में पानी भरते ही, मानों राजनीति भी चालु हो गई, कभी कांग्रेस के नेता तो कभी बीजेपी के नेता, बस्तीवालों के हमदर्द बनकर आते थे। पार्षद और नेता, मंत्री के आने पर बस्ती के कुछ जागरूक लोग विरोध भी करते थे। कहते थे - बरसात के पहले सुविधा प्रदान नही किया जाता और घरो में पानी घुसने के बाद हमदर्द बनने आ जाते हैं। हमें अपने हाल पर छोड़ दीजिए, हम सभी इसके आदी हो चुकें हैं। कोई कहता जब सभी नेता, मंत्री को पता होता है की बरसात में यही समस्या आने वाली है तो इसका समाधान क्यों नही किया जाता। तो कुछ चापलुस लोंग नेताओं के आवभगत पर लगें रहते थे। एक नेता तो बकायदा पानी भरने पर लोंगो के लिए बिरयानी पैकेट तक बटंवाता है और न्युज पेपर में अपना फोटो बिरयानी बाटते हुए छपवाता था। जिन्हें समस्या रहती थी वे लोग गुस्से से वोट ना देने की बात करते थे। परन्तु जैसे ही चुनाव आते वही लोग दौड़-दौड़ कर नेताओ के रैली में भाग लिया करते थे। मगर उनकी आड़ में जो नेता के चापलुस लोग (मानो उनकी लॉटरी निकल पड़ी हो) फायदा उठाते थे। नेता, मंत्री सभी जानते थे कि कुछ लोगो को खरीद लेने से ही चुनाव जीता जा सकता है। यहां की जनता तो वेवकुफ हैं।
नेता, मंत्री सोचें भी तो क्यों ना सोचें, सच ही तो हैं। यहां की जनता भेड़, बकरी की तरह ही है। जो किसी के भी कहने पर कहीं भी चल पड़ते हैं और वोट दे देते हैं। उन्हें अपने वोट की कीमत ही नही मालुम बस बिरयानी और दारू पर बिक जाते हैं। बहुत से जागरूक लोग है परन्तु मानो उन्हें भी सांप सुंघ गया। बस तमाशा देखते रहते हैं। हमारे बस्ती में बस गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव एवं कोई त्यौहार पर ही एकता देखने मिलती है। किसी को कोई लेना देना नही है कि क्या होगा? तमाशा देखने से कुछ हासिल नही होगा इसके लिए कुछ ना कुछ करना पड़ेगा। अपने वोट की कीमत को समझना पड़ेगा और जो भेड़, बकरी हैं ( हमारे ही भाई ) उन्हें भी वोट की कीमत समझाकर सहीं राह पर चलाना होगा। जिम्मेदार आदमी वही है जो अपनी जिम्मेदार को समझे और दूसरों को भी जिम्मेदारी को समझाऐं। केवल गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव पर ही एकता रहने से नही चलेगा।
इस लेख से यदि किसी को बुरा लगा हो तो माफ करें, मगर सच्चाई छुप नही सकती बनावटी उसूलों से, खुश्बु आ नही सकती बनावटी फूलों से।      

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

जरूरतमंद की मदद कर, एक बार सुकुन की अनुभूति करकें देखें

मेरे मोहल्ले की एक विधवा वृध्दा महिला जिसकी उम्र लगभग 65 साल है। उसके 2 बेटे हैं। उसका बड़ा लड़का है पर ना के बराबर वह अपने माता और अपने बीमार छोटे भाई को छोड़कर अपनी बीबी के साथ अलग रहता है। वृध्दा और उसका बीमार पुत्र दोनों साथ रहतें है। 5 साल पहले उसका छोटा पुत्र खेलता, कुदता और डांस करता मगर जालिम बीमारी से उसकी खुशी देखी नहीं गई और बेचारा बीमारग्रस्त हो गया। बहुत से डाक्टरों और दवा-दारू किया गया परन्तु वह ठीक नही हो पाया। उसे मेकाहारा में भर्ती कराया गया। डाक्टरों ने आपरेशन की बात की गरीबी रेखा कार्ड होने के कारण सरकार द्वारा संजीवनी कोष से सहायता राशि प्राप्त हुई और आपरेशन भी हो गया किन्तु पहले थोड़ा बहुत चल फिर सकता था मगर आपरेशन के बाद तो और प्राब्लम होने लगा। अब वह उठ बैठ नही सकता, उसका देखरेख उसकी वृध्दा माता को करनी पड़ती है। बस बिस्तर पर पड़ा रहता हैं और भगवान से दुआ करता है कि कब उसे मुक्ति मिलें। उम्र अधिक होने के कारण वह अधिक कार्य भी नही कर सकती। बीमार बेटे को छोड़कर वह कहीं जा भी नहीं सकती, बस आस-पास ही किसी के यहां बर्तन साफ कर, पोछा लगाकर अपना व बेटे का पेट पालती थी।
दिनांक 18.04.2011 को तेलीबांधा तालाब योजना में जलविहार को तोड़कर निवासियों को बोरियाकला में शिफ्ट किया गया है। तब से और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। बीमार बेटे को छोड़कर बोरियाकला से रायपुर लगभग 13 कि.मी. दूर जाये भी तो कैंसे? राशन कार्ड से चावल तो मिलता है परन्तु जीवन यापन के लिए केवल चावल ही काफी नहीं है। केवल चावल को खाकर कोई रह सकता है, क्या ? साग-सब्जी, हल्दी, मिर्च, तेल, नमक की आवश्यकता तो आम आदमी को होती ही है। 2 माह तक कैसे उनका गुजारा हुआ है वहीं जानती हैं। एक दिन मैं उसी ब्लाक में अपने रिश्तेदार के यहां गया था। वापसी में, मेरा अचानक उनके घर जाना हुआ। मिलने पर मुझसे उन्होंने मदद की गुहार लगाई ( इससे पहले भी मैं मेकाहारा में आपरेशन के वक्त उनके लिए दौंड भाग किया था ) मुझसे उनकी हालत देखी नहीं गई। मैंने ठान लिया की इनके लिए कुछ ना कुछ जरूर करूंगा। मेरा अंतर्मन मुझे गवाही दे रहा था कि इंसानियत के लिए बहुत जरूरी है इनकी मदद करना। मैंने आफिस आकर एक पत्र बनाया। पत्र का प्रारूप 
प्रति,
            माननीय राजेश मुणत जी
            नगरीय निकाय मंत्री
            छ.ग. शासन
विषय - मैं वृध्दा एवं मेरे बीमारग्रस्त पुत्र को आर्थिक सहायता एवं 
       शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता एवं सुविधा 
       प्रदान करने बाबत्।
आदरणीय महोदय,
      निवेदन है कि ..................................................
      ....................................................................................

प्रतिलिपी - 1. श्रीमती प्रतिभा पाटिल, राष्टपति 2. आयुक्त नगर निगम, रायपुर छ.ग. 3. महापौर, नगर निगम, रायपुर छ.ग. 4. श्रीमती रेखारामटेके, पार्षद, वार्ड क्रमांक 43, रायपुर छ.ग.

इस प्रकार से मैंने पत्र लिखा। उसी दिन मेरे वकील मित्र अनिल वर्मा का आफिस में आना हुआ। मैंने उन्हें उस पत्र को दिखाया। उन्होंने पत्र में कुछ लाईन जुड़वाया, जो निम्न थी -
आदरणीय महोदय जी, यदि शासन द्वारा मेरी आर्थिक सहायता एवं योजनाओं के अंतर्गत सुविधा प्रदान नही की जाती है तो मेरे पुत्र को जोकि शारीरिक रूप से अपंग है व बीमारग्रस्त है को मृत्यु दान दें तथा मैं आत्म हत्या करने हेतु बाध्य हो जाऊंगी जिसकी समस्त जिम्मेदारी छ.ग.शासन की होगी। मैं निरक्षर हूं तथा इस पत्र को पढ़वाकर, सुनकर अपनी रजामंदी से अपना अंगूठा निशानी लगाती हूं। ताकि वक्त पर काम आवें।
फिर मैंने घर जाकर पत्र को माता जी को पढ़कर सुनाया और कहा कि आपको किसी प्रकार का कोई शब्द बदलना है तो बदल दूंगा। ठीक है या नही। दोनों मां बेटे ने पत्र पर हामीभर दी और कहा कि सच्चाई तो है, इस पत्र में।
दूसरे दिन 27.06.2011 को मैंने माता जी को लेकर मंत्री महोदय के पास पहुंचा। मैंने उन्हें समझाया दिया था कि महोदय से अच्छे से अपनी समस्या से अवगत कराना। मंत्री जी से मुलाकात हुई माता जी ने अपनी समस्या बताई और मैंने भी महोदय जी से इनकी समस्या को अवगत कराया। मंत्री जी अपने पी. ए. को बुलाया और समस्या के निराकरण हेतु आदेश दिया।
पी. ए. द्वारा छ.ग. हाऊसिंग बोर्ड फोन कर माता जी के लिए कोई कार्य की बात सिफारिश की। छ.ग. हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारी ने कहा की शंकर नगर आफिस पर पानी पिलाने का कार्य कर सकती हैं। परन्तु मैंने व माता जी ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि बोरियाकला से बीमार पुत्र को छोड़कर नही आ सकती। आस पास ही कहीं काम दिलवा दीजिए..। पी.ए. जी बोले ठीक है आप अपना नंबर छोड़ दीजिए, जैसे ही कुछ होगा आपको सूचना दे दिया जायेगा। मैंने फोन नं. दिया और हम वहां से निकल पड़े।
माता जी को आटो मे बैठाकर, मैं आफिस के लिए निकला। पत्र की प्रतिलिपी आयुक्त, महापौर और पार्षद महोदया को देना था तो महापौर से मिला।
महापौर ने कहा - आप लोगों को इतनी सुविधा दिया जा रहा हैं परन्तु रोज-रोज कोई ना कोई नई-नई समस्या लेकर आ जाते हो ?
मैंने कहा - मैडम, समस्या आती हैं, तभी तो आपके पास आते हैं, समस्या नहीं रहेगी तो आपके पास क्या करने आऐंगें।
महापौर ने कहा - घर तो दिया गया हैं, अब नौकरी भी देंगे क्या ? सिटी बस लगाया गया हैं, काम करने आ सकती हैं रायपुर।
मैंने कहा - मैडम, रायपुर 13 कि.मी. अपने बीमार पुत्र को छोड़कर नही आ सकती हैं।
महापौर ने कहा - पहले कैसे करती थी ?
मैंने कहा - जल विहार में रहती थी तो आस पास के घरो में काम करती थी अब यहां से रायपुर कैसे जा सकती हैं।
महापौर ने कहा - हाऊसिंग बोर्ड में भी लोग आने लगे हैं वहां पर काम कर सकती हैं। (पास बैठे उनके कुछ लोगों ने भी हामी भर कर, कह रहे थे, हाँ वहीं लोग आने लगे हैं।)
(मैंने थोड़ा आवेश में आकर कहा) - आप लोग यहां रहते हैं। आप लोगों को नही मालूम अभी वहां अधूरा निर्माण है। वह तो मैडम कि कृपा से हम सभी वहां मजबूरी में रह रहे हैं।  
महापौर (थोड़े गुस्से से ) कहा -  ठीक हैं, देखेंगें।
मैंने मैडम को - शुक्रिया कहते हुए बाहर आ गया।
बाहर आकर मैं मन ही मन उन्हें कोसता रहा की किसी गरीब की मजबूरी बड़े ओहदें पर आने के बाद किसी को नही दिखता। बस चुनाव के समय अपना हमदर्द बनकर झूठ का आवरण ओढे रहते हैं। पत्र की प्रतिलिपी देकर मैं आफिस आ गया।
शाम को घर जाने के वक्त पार्षद महोदया के पास पत्र की प्रतिलिपी देने के लिए गया। (पार्षद महोदया नाम की पार्षद हैं, सारा कार्य तो पार्षद पति श्री प्रकाश रामटेके भैया जी ही देखते हैं।) दोनों ही घर पर उपस्थित थे। मैंने पत्र देते हुए समस्या से अवगत करवाया।
पार्षद महोदया पत्र पढ़ने के बाद उन्हें इस बात की चिंता थी, कि पत्र की प्रतिलिपी में मैंने माननीय आयुक्त महोदय जी का नाम, महापौर मैडम के ऊपर रखा था। श्रीमती रेखा रामटेके (पार्षद, वार्ड क्रमांक 43) ने कहा - अरे, महापौर मैडम को आयुक्त के नीचे रखे हो। उन्हें ऊपर रखना था।
मैंने कहा - दीदी मैं तो सभी को बराबर समझता हूं। (मैं मन ही मन सोच रहा था कि पार्षद महोदया को आवेदक की स्थिति की जगह महापौर मैडम की चिंता ज्यादा थी)
रेखा दीदी ने कहा - इसलिए महापौर मैडम ने पत्र का सही जवाब नही दिया होगा।
मैंने कहा - ठीक है। दीदी अगली बार ध्यान रखूंगा। इस गरीब की समस्या का समाधान तो करवाईये।
पार्षद पति (प्रकाश भैया) ने कहा - हमारे हाथ में नहीं हैं। स्कुल में पानी पिलाने का कार्य हम नही रखवा सकते।
मैंने कहा - भैया कुछ तो करवाइए, उन्होनें कहा - शिक्षा मंत्री ही कुछ कर सकते हैं।
मैंने कहा - आप कुछ तो ज्ञान दीजिए, हम अज्ञानी हैं।
प्रकाश भैया - बंटी, तुम सबकुछ जानते हो, होशियार हो मगर बेवकुफ बनते हो। एक काम कर मंत्री महोदय से जनदर्शन में मिलो। (मैंने सोचा कैसा पार्षद है, चाहे तो काम करवा सकता हैं। मगर करना नहीं चाहते हैं)
मैंने कहा - भैया ठीक है। एक काम तो करवा दीजिए, वृध्दा गरीब को 10 किलो चावल अतिरिक्त मुफ्त में मिलता हैं। उसे तो वह दिलवा दीजिए।
उन्होंने कहा - राशन कार्ड है, 35 किलो मिलता है तो 10 किलो नही मिलेगा। किसी और का बनवाना है तो बताओ, बनवा देंगे।
मैंने कहा - आदरणीय, जो सचमुच जरूरतमंद हैं। जिन्हें वाकई में सहायता की आवश्यकता है तो उसका हमें हेल्प करना चाहिए।
प्रकाश भैया - किसी एक आदमी को थोड़े ना सारा सहायता दिलायेगें ?
मैं थोड़ा ताव में आकर कहा - सरकारी योजनाएं किसके लिए है ? जो जरूरतमंद है उसी के लिए ही है ना, जब समय पर सरकार की योजनांए काम नही आऐगी तो क्या मतलब योजनाओं का? वास्तविक हकदार को ना मिले और जो हकदार नही है, जो सक्षम है, उसे लाभ मिले तो क्या मतलब हैं योजनाओं का।
प्रकाश भैया - बंटी, बहुत बोलता है। यह केन्द्र की योजना है। इसके कुछ नियम शर्ते हैं। उसका पालन करना पड़ेगा।
मैंने कहा - ठीक है, कहां बनेगा बताए मैं कोशिश करूंगा।
उन्होंने कहा - ठीक है देखते हैं, कुछ हो पाता हैं या नहीं। ( मैं मन ही मन पार्षद को भी कोसता हुआ घर के लिए निकल पड़ा।)
पांचवे दिन 31.06.2011 को जब माता जी से मिलने गया तो पता चला की मंत्री जी के यहां से फोन आया था और हाऊसिंग बोर्ड बोरिया के इंचार्ज द्वारा घर पर आकर माता जी को आफिस में आने को कहा गया हैं।
मैंने कहा - किससे बात हुई ? कौन से महोदय जी आऐ थे ? क्या नाम था ?
अभिषेक (बीमारग्रस्त) ने कहा - नाम नही पता पर काम पर आने को कहा हैं।
मैंने कहा - किसी का भी फोन आए या कोई भी आए पहले नाम पूछना और कहां से आएं हैं, अब कैसे बात होगी। कैसे पता चलेगा की कौन आया था। ?
      मेरी बात खत्म नहीं हुई थी, घर के दरवाजे पर कोई आया और कहा - आपको आफिस आने को कहा था क्यों नही आई, बस मंत्री जी को शिकायत करते हो, काम वाम नही करना है क्या ? 
मैंने कहा - आइए सर अन्दर बैठिये।
उन्होनें कहा - ठीक है, जल्दी आफिस देख लो और काम चालू कर दो।
मैंने महोदय जी से कहा - जी सर, आफिस मैं भेजता हॅूं।
माता जी मेरे पास आकर, मेरे सिर पर हाथ रखकर रोते, आर्शिवाद देते हुये बोली - बेटा हमने 2 माह पहले से इतने लोगों को, हमारे मोहल्ले के कई सज्जनों को हमारी समस्या बताई और सहायता के लिए कहा परन्तु किसी ने भी हमारी मदद नही की किन्तु बेटा तू अपना कीमती समय निकालकर, हमारा काम करवा दिया। भगवान तुझे बहुत खुशियां दें और भविष्य में हमेशा आगे बढ़ते रहो, तुम्हारी सारी मनोकामनांए पूर्ण हो।
मेरे भी आंखो में खुशी के आंसू आने लगें। मैंने कहा - माता जी, यह तो भगवान की कृपा हैं। मैं तो एक माध्यम हूं, करने वाला तो वह ऊपर वाला भगवान ही हैं।
मेरे आफिस का टाइम होने के कारण मैं वहां से निकल पड़ा। रास्ते भर सोचता रहा और मन में अजीब सी खुशी महसूस हो रही थी। बस भगवान को धन्यवाद देते हुए। सोच रहा था कि, मेरी मेहनत रंग लाई। रास्ते का समय ऐसे बिता की कब मेरा आफिस आ गया पता ही नही चला।
आफिस पहुंच कर सबसे पहले मैंने अपने वकील मित्र अनिल वर्मा जी को फोन लगाया और अपनी सफलता की कहानी बताकर उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा - वर्मा जी, बहुत-बहुत धन्यवाद आपके हेल्प के कारण हम कामयाब हुए और किसी गरीब का समस्या का समाधान हो गया।
उन्होंने कहा - नही, नही बंटी, यह सब तुम्हारी मेहनत और ऊपर वाले की इच्छा से हुआ है मैंने तो बस पत्र बनाने में थोड़ा हेल्प किया था। (मैंने मन में सोचा सच्चे इंसान की परख इसी से होती है कि वह सफलता का श्रेय केवल अपना ना लेकर अपने साथी जो मदद करता है, उन्हें देतें हैं, वर्मा जी एक सच्चे इंसान हैं।)
मैनें कहा - वर्मा जी, चाहे आपने जैसे भी मेरी मदद की सफलता में आपका भी श्रेय जाता हैं। मैं अपने सभी मित्र जिन्होंने मुझे इस समस्या पर किसी भी तरह से सहायता दिया हैं उन सभी को इस सफलता का श्रेय अवश्य दूंगा।
(इस कार्य पर किसी ना किसी तरह से मेरी मदद किये है वे हैं। मेरी धर्म पत्नी बरखा निहाल, मेरे आदरणीय दिलीप कुमार, आदरणीय पारथो मोंगराज, आदरणीय धनेश्वर लहरी (नरेश भैया), आदरणीय जयंत कंटकार (बाबा भैया) एवं मेरे परिवार वाले। )
मेरे मन में अजीब सी खुशी थी। मुझे लग रहा था कि मैंने बहुत बड़ी जंग जीत ली है। किसी की मदद कर इतनी सुकुन मिलती है, पहली बार एहसास हो रहा था। बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने ठान लिया की कुछ भी हो जाये। मुझसे जितना हो सके मैं जरूरतमद के लिए जरूर मदद करने के लिए आगे आऊंगा। आप सभी से मेरा अनुरोध है कि जरूरतमंद की मदद कर, एक बार सुकुन की अनुभूति करकें देखें - बंटी निहाल

बुधवार, 13 जुलाई 2011

बिन गुरु ज्ञान नहीं

                   कार्य समाप्त कर घर जाने के लिए दिलीप भैया को फोन लगाया, उन्होंने कहा - आज मुझे आवश्यक कार्य आ जाने के कारण जल्द ही घर के लिए निकल गया हूं, कल साथ मे निकलेंगे। फिर मैंने पारथो भैया को लगाया उन्होनें कहा मुझे मेरे कार्यालय शंकर नगर के पास मिलो चलेंगे। मैं शंकर नगर उनके कार्यालय में पहूंचा और हम साथ मे निकल पड़े। पारथो भैया बहुत ही मस्तमौला इंसान हैं। वे घर जाते वक्त रास्ते में कई बार कुछ ना कुछ खिलाते हैं और मुझे बिल भरने नही देते। मैं ठान लिया था कि इस बार मैं बिल भरूँगा । रास्ते में आनन्द नगर स्थित बिसम्बर भैया का खुश्बु दाबेली सेंटर हैं। मैं पारथों भैया को वहां लेकर गया और एक-एक दाबेली खाने के लिए कहा। पहले तो वे ना नुकुर किये फिर खाने के लिए राजी हो गये। 
                          बिसम्बर भैया दाबेली इतना स्वादिस्ट बनाते है कि दूर-दूर से लोंग खाने आते है, इस दाबेली की खासियत यह है कि वे इसे पाव ब्रेड से नही बर्गर ब्रेड से और स्पेशल मसाले,  अतिरिक्त मखन डालकर बनाते हैं, बहुत ही गजब का स्वाद है दाबेली में। इनके यहाँ बहुत भीड़ भाड़ रहता है, परन्तु परिचित होने के कारण बीच में ही जल्द ही मिल जाता है। एक दाबेली खाने के बाद फिर क्या था, एक के बाद दूसरा और दूसरे के बाद घर के लिए पैकिंग करवा लिया। दाबेली खाते-खाते मैंने पारथो भैया को बताया कि दिलीप भैया को भी पहली बार दाबेली खिलाया तो उन्होंने भी दाबेली की तारिफ की और अपने परिवार के लिए भी पैक करवा कर ले गये।
                        दाबेली खाने के बाद हम घर के लिए निकल ही रहे थे कि मेरी नजर पास के दुकान के पास खड़े मेरे हाई स्कुल के शिक्षक पर पड़ी। उन्हें देखकर मुझे अजीब सा अनुभुति हुआ। मैं तुरंत अपने शिक्षक के चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लिया, मुझे देखकर मेरे शिक्षक बहुत ही प्रसन्नता से पूछा और कैसा है हाल-चाल, बहुत दिनों बाद मिले। 
मैंने कहा - बस सर, आपके आशिर्वाद से सब ठीक चल रहा हैं। 
शिक्षक ने कहा - क्या कर रहे हो आज कल ? 
मैने कहा - कुछ नही, बस एक अखबार में उप संपादक हूं। 
              मेरे इतना कहने पर उनकी खुशी और बढ़ गई और उन्होंने कहा - शाबाश बेटा, अच्छा कार्य कर रहे हो, अपने छात्रों को अच्छे मुकाम पर देखकर मन प्रसन्न हो जाता हैं। कहते हुए मेरी पीठ थप्पथपाई 
मैंने कहा - बस आपका आशिर्वाद हमेशा बना रहे। 
उन्होंने कहा - हम इतने छात्रों को शिक्षा देते है और ये छात्र आगे चलकर अच्छे-अच्छे कार्य करते हैं तो इससे बढ़कर हमारे लिए खुशी की क्या बात होगी ? 
मैंने कहा - आप शिक्षकों की मेहनत की वजह से ही छात्र-छात्राऐं आगे बढ़ते हैं। इसमें आप सभी का ही हाथ होता है। 
उन्होंने कहा - हम तो अपना कर्तव्य निभाते हैं, आगे छात्र कितना मेहनत करता है और सही मार्ग पर चलता है, यह उसके ऊपर हैं। फिर उन्होने कहा अच्छा लगा मिलकर, मिलते रहना। ( अजीब सी खुशी देखी मैंने उनकी आंखों में।)
              कितनी ही अजीब बात है। पहले शिक्षक इसे अपना कर्तव्य मान कर शिक्ष दिया करते थे और एक आज के शिक्षक है जो पहले प्राथमिकता शिक्षा के बजाय पैसों को देते हैं। इसका एक ताजा उदाहरण ''पीएमटी पर्चा लीक कांड'' ही देख लीजिए। आज कल के शिक्षक प्रोफेशनल हो गये है और शिक्षा को अपने फायदे के लिए बेचने लगें हैं। यदि सभी शिक्षक अपने कर्तव्य का पालन करेंगे तो देश का भविष्य नौजवान छात्र-छात्राऐं देश की उन्नति में कितना साथ दे सकते है। यदि शिक्षक चाहें तो अपने छात्रों को ऊचांइयों पर पहुंचा सकता हैं, देश के नौजवान को सही राह दिखाना उन्हें उचित मार्ग दर्शन देना ही गुरू है और गुरू के सिखाए व दिखाऐ गये राह पर चलना ही सच्चा शिष्य कहलाता है। जो शिक्षा देता है वह ही गुरू नही अपितु गुरू चाहे आपको आपके जीवन में किसी भी तरह से शिक्षा दे गुरू कहलाएंगे। जो आपके मुश्किल समय मे आपका साथ थे वह भी गुरू हो सकता हैं। 
                           मेरे जीवन मुझे अभी तक जिन्होने शिक्ष दिया है। मेरी माता, वे सभी शिक्षक जिन्होनें मुझे शिक्षा दिया और मेरे धार्मिक गुरू श्री यदुराम साहु जिन्होंने हमें धार्मिक ज्ञान दिया है। इसके साथ ही मेरे बॉस श्री मधुर चितलांग्या जिनके द्वारा मुझे बहुत सी बाते व ज्ञान सिखने के लिए मिला, साथ ही जिन्होंने मुझे पेपर मेकिंग सिखाया श्री मधु सुदन जी व जिन्होंने मुझे वीडियो मिक्सींग सिखाया श्री मुकेश जी, व जिन्होंने मुझे कानुनी ज्ञान दिया श्री दिनेशराय द्विवेदी, राजस्थान, व अनिल कुमार वर्मा (एडव्होकेट) रायपुर. मेरे गुरु ने कहा है जिसका कोई गुरु नहीं उसका गुरु हनुमान जी  और साईं बाबा है.
                          मेरे  सभी आदरणीय गुरूजनों को मेरा सादर नमन - बंटी निहाल, रायपुर 

सोमवार, 11 जुलाई 2011

"हाथी चले बाज़ार, कुत्ते भोंके हज़ार"

आपने पिछले अंक में (जनता बहुत चलाक है.) पढ़ा था की महापौर  को समस्या से अवगत करने हेतु संघ द्वारा महापौर से समय लिया गया था परन्तु किसी कारणवश उनका आना नहीं हो पाया अब आगे......... 
दुसरे दिन हम सभी सदस्य  मोह्लावासीयो को बताने लगे की महापौर इस रविवार नहीं आ पाएंगी. इससे  सभी मोह्लावासी उदास हो गए और कहने लगे, आये जाहे ना आये अगली बार कोई नहीं रहेगा. यहाँ तक की कुछ ने तो यह कह दिया की आप लोग बस झूठ बोलते है. महापौर का क्या काम है ? उसका मतलब निकल गया, अब वो क्या करेगी आकर. कुछ लोग कहने लगे की आप लोग राजनीति मत करो यहाँ पर जो राजनीति करेगा उसे बहुत मार पड़ेगी. हमें हमारे हाल पर छोड़ दो नहीं तो ठीक नहीं होगा.  हमारे द्वारा उन्हें समझाने की कोशिश किया गया परन्तु वे मानने वाले नहीं थे. ये इस प्रकार के लोग होते है जो खुद सामने नहीं आयेगे परन्तु किसी और को भी नहीं आने देंगे. इन्ही कुछ लोगों की वजह से हम सब पीछे है. हमारे संगठन सचिव श्री अब्दुल रउफ खान  ने कहा की इनकी बातों को बुरा मत मानो, ये ऐसे ही है, बस टांग खीचते है. हाथी चले बाज़ार कुत्ते भोके हज़ार. अच्छे कार्य के लिए हमेशा ठोकर खाना पड़ता है. बस अपना कार्य करते रहो.
मैंने कहा - यदि सभी इन लोगों के जैसे सोचेंगे तो कौन आगे आएगा. किसी को तो आगे आना है. या तमाशा देखते रहेंगे ?
सभी ने कहा - आप ठीक बोल रहे है. हमें अपने कार्य को देखना चाहिए, आगे क्या करना है उसे सोचे ? फिर हम सभी ने यह निर्णय लिया की महापौर के पास दुबारा जाकर समय फ़ाइनल करेंगे, सभी ठीक ४ बजे नगर निगम कार्यालय में आ  जाना कहते हुए अपने अपने कार्य को निकल पड़े.
मैं अपने ऑफिस के मित्र दीपक यादव के साथ चाय पीने ४ बजे नीचे उतरा था. तभी संघ के अध्यक्ष श्री धनेश्वर लहरी (नरेश भैया) जी का फ़ोन आया. उन्होंने कहा - मैं अभी रस्ते में हूँ, मैं दिलीप भाई के साथ पहचुंगा, तुम कहाँ हो ? मैंने कहा - मैं भी निकल रहा हूँ. वही मिलता हूँ. फिर क्या था हमारे सचिव श्री पार्थो जी का भी फ़ोन आने लगा. मैं पहुचने वाला था तो फ़ोन नहीं उठाया और उनके पास पहुँच गया. 
पार्थो जी ने कहा - अरे यार मैं कब से निगम कार्यालय पहुँच कर तुम लोगो का इंतजार कर रहा हूँ अभी तक हमारे अध्यक्ष भी नहीं पहुंचे. मैंने कहा की वो भी रास्ते मैं है. बस आ ही रहे होंगे. थोड़े देर में वे भी आ गये. हम सभी तैयारी कर महापौर के पास गए.  थोड़े इन्तजार के बाद महापौर मीटिंग ख़त्म कर आई. बहुत से लोग उनका इन्तजार कर रहे थे. उनके आते ही सभी उन्हें मुस्कुराते हुए नमस्कार किये. कुछ लोगो का महापौर के नए कार्यालय आने पर उन्हें बधाई देने के लिए ताँता भी लगा हुआ था. एक पार्टी ने मिठाई का डिब्बा महापौर को दिया महापौर ने सभी को खिलाने का इशारा किया फिर क्या था सभी की ओर मिठाई का डिब्बा घूमता हुआ  मेरे पास भी आई मैंने मिठाई उठाई, काजू कतली बहुत ही अच्छी लगी.
महापौर की नज़र हमारे पास पड़ी उन्होंने तपाक से बोला - अरे, आप लोग बोरिया वाले हो ना ?
संघ के अध्यक्ष ने खड़े होकर कहा - जी मैडम
महापौर ने कहा - मैंने मंगलवार को ८ बजे आने के लिए कह चुकी हूँ फिर आप लोग कैसे.?
नरेश भैया ने कहा - हमें किसी प्रकार की कोई सुचना नहीं मिली है , तो कंफर्म करने आये थे.
महापौर ने कहा - क्या मुझे कार्ड छपवाना पड़ेगा ? ८ बजे आ रही हूँ. यदि कोई दारु पिया हुआ मेरे पास आया तो ठीक नहीं होगा ? वहां किसी भी प्रकार का हल्ला चिल्ला नहीं होना चाहिए इसकी जिम्मेदारी आप लोगों की है.
पार्थो जी ने तुरंत कहा - देखिये महोदया हम इतनी जनता में कब कौन क्या करे नहीं कह सकते है. मगर एक बात है जनता इतनी जल्दी भी सुबह ८ बजे नहीं पी सकती. यदि इस प्रकार से कोई आपके पास आये तो आप जरुर उसे एक तमाचा मार सकती है.
महापौर ने कहा - मेरा बस चलता तो जरुर मारती, मीडिया वाले रहतें है इसलिए कुछ नहीं कर सकती. हम सभी हँसते हुए, ठीक है कह कर बाहर आ गये.
कार्यालय से बाहर आकर हमें बहुत बुरा लग रहा था. हमने तभी अटकले लगाना चालू किया की हो न हो जरुर महापौर को पार्षद द्वारा भ्रमित किया गया होगा तभी उनके द्वारा रविवार को आने के लिए मना किया गया था. हमें समझ नहीं आ रहा था की इतनी जल्दी सभी को कैसे खबर किया जाये. हम सभी तुरंत निकल कर तैयारी करने के लिए बोरिया प्रस्थान किया. रात के २ बजे तक हमें नींद नहीं आई, बस तैयारी में लगे थे. सुबह जल्दी उठना था इसलिए मीटिंग जल्द  ख़त्म कर सभी सोने के लिए चले गए. सुबह 6 बजे उठ कर, सभी अपने अपने कार्य पर लग गए कोई फूल लेने गया] तो कोई बैनर- पोस्टर लगाने में लग गया. धीरे-धीरे समय का पता ही नहीं चला ८ बजे आने वाली महापौर मैडम ९.३० को पहुची. उनका जोरदार तरीके से स्वागत किया गया. उनके चेहरे पर मीठी मुस्कान थी. उन्होंने इसकी आशा नहीं की थी की इस तरह से उनका स्वागत सत्कार होगा. उन्होंने तो सोचा भी नहीं था की वे यहाँ जाने के लिए डर रही थी. वहां इतना अच्छा रेस्पोंस मिलेगा. सबसे पहले उनका स्वागत किया गया और फिर अपनी समस्याओ के बारे में अवगत कराया गया. पार्षद महोदय भी दो शब्द कहे और महापौर ने भी ख़ुशी-ख़ुशी समस्याओ का  निराकरण करने का आश्वासन दिया. और चली गयी.  
हमें ख़ुशी हुई की हमारे प्रयास कामयाब हो गया. पूरे कार्यक्रम के लिए संघ के सदस्य द्वारा १०० - १००  रुपये  चंदा किया गया था. बजट ज्यादा हो गया था, संघ के सचिव श्री पार्थो भैया द्वारा अतिरिक्त १००० रुपये दिया गया, जिसे बाद में चंदा कर लौटने की बात तय की गयी. फिर सभी अपने अपने कार्य के लिए चले गए. 
शाम को ८ बजे घर वापसी में पता चला की  कुछ लोंगों द्वारा तरह-तरह की बातें हो रही है, कोई कह रहा है की महापौर ने स्वागत समारोह के लिए ५००० रुपये दिया. तो कोई कह रहा था की १०० - १०० रुपये चंदा कर, बचाकर खूब मौज मस्ती किया गया है. तो कोई कहा सभी सदस्य को १००० रुपये मिले है. 
अब आप ही बताइए की हमें समारोह के लिए पार्थो जी से उधार १००० रुपये लेने पड़े और ये लोग तरह-तरह की बातें कर रहे है. खैर इसे छोडिये इनका काम ही यही है एक रुपये देना नहीं और ५००० रुपये की बात करते है. किसी ने सच कहा है की " हाथी चले बाज़ार,कुत्ते भोंके हज़ार" .................... शुक्रिया 

शनिवार, 9 जुलाई 2011

जनता बहुत चलाक है.

              तेलीबांधा तालाब सौन्दर्यीकरण से प्रभावित नागरिको को अस्थाई बोरियाकला हाऊसिंग बोर्ड कालोनी मे विस्थापित किया गया है. प्रभावित नौकरी, अपने कार्य करने रायपुर शहर लगभग १३ किलोमीटर आना जाना होता है। इसके लिए शासन द्वारा २ सिटी बस सुबह ८.०० बजे और ९.३० बजे आती है. परन्तु वहां की जनता जो लगभग ४००० परिवार है उन्हें २ सिटी बस ( क्षमता लगभग ४० से ५० सीटर )  से क्या होने वाला ? इसलिए हमारे यहाँ के ऑटो रिक्शा चालक भाइयो की निकल पड़ी. लगभग एक माह तक बहुत ही अच्छी कमाई होने लगी. फिर क्या था बहुतो को कमाने का चस्का लगा और देखते-देखते लगभग ३० से ४० ऑटो आ गये. किसी ने उधार, तो किसी ने सोना बेचा और ऑटो ले लिया. लगता है की आने वाले सालों में ऑटो की संख्या और बढेगी. 
                यहाँ की जनता भी उतनी ही चलाक है. ऑटो में बैठती है मगर जैसे ही सिटी बस आती है. उठकर बस में चले जाते है, जाते भी क्यों न ( पास जो बना था २ माह का) हमेशा ऐसा बार-बार करने पर एक ऑटो वाले को  गुस्सा आ गया उसने सवारी को बोल दिया, अगली बार मेरे ऑटो में मत बैठना बस से ही आना जाना करना. जो समझदार था वो तो चुपचाप बैठ गया परन्तु जो जिद्दी थे, वो बस में चले गए. समझदार व्यक्ति करता भी क्या ?सरकारी बस कब तक साथ देगा. कभी-कभी बस आता ही नहीं, से में खतरा मोल नहीं ले सकता था. आखिर ऑटो वाला अपना ही मोहल्ले का है. 
               ''बोरियाकला अस्थाई व्यवस्थापित निवासी संघ'' ने कालोनी में विभिन्न समस्याओ के निराकरण के लिए  महापौर को बुला कर दिखाने का निर्णय लिया और प्रतीनिधियो द्वारा महापौर से समय लेने के लिए  कार्यालय पहुंचे और पार्षद महोदय का इन्तजार करने लगे. पार्षद नहीं आने पर अध्यक्ष द्वारा उन्हें फोन करने पर, पार्षद ने रास्ते में हूँ कहा. इसी प्रकार ३ से ४ बार फोन करने पर वही जवाब मिलता. फिर पता चला की महापौर महोदय का गाड़ी लग रहा है उन्हें निकलना है.  हमने पार्षद का इन्तजार ख़त्म कर महापौर श्रीमती किरणमयी नायक के कार्यालय में गए. और सविनय निवेदन किया की एक बार आप बोरियाकला आकर हमारे समस्या को देखे. 
महापौर ने  पार्षद जी को फोन लगाया और कहा मैं पार्षद जी के साथ ही आउंगी ( अकेले आये भी कैसे जनता नाराज जो थी उनसे, जनता के आक्रोश के डर के कारण अकेले नहीं आना चाहती है.) फिर उन्होंने पूछा कब आना है ? 
अध्यक्ष श्री धनेश्वर लहरी ने कहा- मैडम हमारे यहाँ के सभी जनता अपने अपने कार्य में व्यस्त रहते है उन्हें बस रविवार को ही समय मिलता है. आप यदि रविवार को आएँगी तो सभी के सामने चर्चाये हो जाएँगी, आपकी कृपा होगी. 
उन्होंने कहा - ठीक है, मैं रविवार को आउंगी, क्या प्रोग्राम है आप लोगो का ? 
संघ के सचिव श्री पार्थो राव मोगराज जी ने कहा - मैडम आप हमारी परिवार की सदस्य है. हम कुछ नहीं कर सकते, बस हमारे पास जो कुछ मिलेगा उसी से, कम से कम एक गिलास पानी तो जरुर पिला सकते है.
महापौर मुस्कुराते हुए बोली- हां जरुर. 
               फिर सभी सदस्य हसते हुए  ख़ुशी- ख़ुशी बहार निकले. पार्षद महोदय अभी तक नहीं पहुँच पाए थे. उन्हें फ़ोन लगाया परन्तु फ़ोन नहीं लगा. हम सभी जोरो सोरो से तयारी में भीड़ गए. फिर पार्षद जी का फोन आया उन्होंने कहा की महापौर जी रविवार को नहीं आ पाएंगी. उनका दूसरा प्रोग्राम बन गया है. उन्हें जगनाथ मंदिर, सीएम और राज्यपाल के प्रोग्राम में जाना है. फिर क्या था हम सभी को गुस्सा आने लगा. सभी तैयारिया पूरी हो चुकी थी.  आगे के बारे में अगले अंक में विस्तार से लिखूंगा........धन्यवाद 

सोमवार, 27 जून 2011

मानहानि का दावा क्या है? इसे किस प्रकार से न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है?

मेरे मन में बहुत दिनों से एक सवाल था. जिसे मेरे गुरु श्री दिनेशराय द्विवेदी जी को  अपने मन की उलझन के साथ बताया. गुरु जी ने बहुत ही खूबसूरती से इसके बारे बताया है. मेरा सवाल था की  मानहानि का दावा क्या है?  इसे किस प्रकार से न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है? और उस का पहला कदम क्या है?
दिनेशराय द्विवेदी जी का  उत्तर - मानहानि के लिए दो तरह की कार्यवाहियाँ की जा सकती हैं। उस के लिए आप अपराधिक मुकदमा चला कर मानहानि करने वाले व्यक्तियों और उस में शामिल होने वाले व्यक्तियों को न्यायालय से दंडित करवाया जा  सकता है। दूसरा मार्ग यह है कि यदि मानहानि से किसी व्यक्ति की या उस के व्यवसाय की या दोनों की कोई वास्तविक हानि हुई है तो वह उस का हर्जाना प्राप्त करने के लिए दीवानी दावा न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता है और हर्जाना प्राप्त कर सकता है। दोनों मामलों में अन्तर यह है कि अपराधिक मामले में जहाँ नाममात्र का न्यायालय शुल्क देना होता है वहीं हर्जाने के दावे में जितना हर्जाना मांगा गया है उस के पाँच से साढ़े सात प्रतिशत के लगभग न्यायालय शुल्क देना पड़ता है जिस की दर अलग अलग राज्यों में अलग अलग है। हम यहाँ पहले अपराधिक मामले पर बात करते हैं।  
        किसी भी व्यक्ति को सब से पहले तो यह जानना होगा कि मानहानि क्या है? मानहानि को भारतीय दंड संहिता में एक अपराधिक कृत्य भी माना गया है और इसे धारा 499 में  इस तरह परिभाषित किया गया है -

जो कोई बोले गए, या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्य निरूपणों द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि की जाएया यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि होगी अपवादों को छोड़ कर यह कहा जाएगा कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है।  
यहाँ मृत व्यक्ति को कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आता है, यदि वह लांछन उस व्यक्ति के जीवित रहने पर उस की ख्याति की अपहानि होती और उस के परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को चोट पहुँचाने के लिए आशयित हो। किसी कंपनी, या संगठन या व्यक्तियों के समूह के बारे में भी यही बात लागू होगी।  व्यंगोक्ति के रूप में की गई अभिव्यक्ति भी इस श्रेणी में आएगी। इसी तरह मानहानिकारक अभिव्यक्ति को मुद्रित करना,  या विक्रय करना भी अपराध है।
लेकिन किसी सत्य बात का लांछन लगाना, लोक सेवकों के आचरण या शील के विषय में सद्भावनापूर्वक राय अभिव्यक्ति करना तथा किसी लोक प्रश्न के विषय में किसी व्यक्ति के आचरण या शील के विषय में सद्भावना पूर्वक राय अभिव्यक्त करना तथा  न्यायालय की कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग भी इस अपराध के अंतर्गत नहीं आएँगी।  इसी तरह किसी लोककृति के गुणावगुण पर अभिव्यक्त की गई राय जिसे लोक निर्णय के लिए ऱखा गया हो अपराध नहीं मानी जाएगी।  
मानहानि के इन अपराधों के लिए धारा 500,501 व 502 में दो वर्ष तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है।  लोक शांति को भंग कराने को उकसाने के आशय से किसी को साशय अपमानित करने के लिए इतनी ही सजा का प्रावधान धारा 504 में किया गया है। 
           जो कोई व्यक्ति अपनी मानहानि के लिए मानहानि करने वाले के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाना चाहता है उसे सीधे यह शिकायत दस्तावेजी साक्ष्य सहित सक्षम क्षेत्राधिकार के न्यायालय के समक्ष लिखित में प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय शिकायत प्रस्तुतकर्ता का बयान दर्ज करेगा, यदि आवश्यकता हुई तो उस के एक दो साक्षियों के भी बयान दर्ज करेगा। इन बयानों के आधार पर यदि न्यायालय यह समझता है कि मुकदमा दर्ज करने का पर्याप्त आधार उपलब्ध है तो वह मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी करेगा। अभियुक्त के उपस्थित होने पर उस से आरोप बता कर पूछा जाएगा कि वह आरोप स्वीकार करता है अथवा नहीं। आरोप स्वीकार कर लेने पर उस मुकदमे का निर्णय कर दिया जाएगा। यदि अभियुक्तों द्वारा आरोप स्वीकार नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता और उस के साक्षियों के बयान पुनः अभियुक्तों के सामने लिए जाएंगे, जिस में अभियुक्तों या उन के वकील को साक्षियों से प्रतिपरीक्षण करने का अधिकार होगा। साक्ष्य समाप्त होने के उपरांत अभियुक्तों के बयान लिए जाएंगे। यदि अभियुक्त बचाव में अपना बयान कराना चाहते हैं तो न्यायालय से अनुमति ले कर अपने बयान दर्ज करा सकते हैं। वे अपने किन्ही साक्षियों के बयान भी दर्ज करवा सकते हैं। इस तरह आई साक्ष्य के आधार पर दोनों पक्षों के तर्क सुन कर न्यायालय द्वारा निर्णय कर दिया जाएगा। अपराधिक मामले में अभियुक्तों को दोषमुक्त किया जा सकता है या उन्हें सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। शिकायतकर्ता को अभियुक्तों से न्यायालय का खर्च दिलाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में कोई हर्जाना शिकायतकर्ता को नहीं दिलाया जा सकता।
           यदि कोई व्यक्ति अपनी मानहानि से हुई हानि की क्षतिपूर्ति प्राप्त करना चाहता है तो उसे, सब से पहले उन लोगों को जिन से वह क्षतिपूर्ति चाहता है एक नोटिस देना चाहिए कि वह उन से मानहानि से हुई क्षति के लिए कितनी राशि क्षतिपूर्ति के रूप में चाहता है। नोटिस की अवधि व्यततीत हो जाने पर वह मांगी गई क्षतिपूर्ति की राशि के अनुरूप न्यायालय शुल्क के साथ सक्षम क्षेत्राधिकार के न्यायालय में वाद दस्तावेजी साक्ष्य के साथ प्रस्तुत कर सकता है। वाद प्रस्तुत करने पर संक्षिप्त जाँच के बाद वाद को दर्ज कर न्यायालय समन जारी कर प्रतिवादियों को बुलाएगा और प्रतिवादियों को वाद का उत्तर प्रस्तुत करने को कहेगा। उत्तर प्रस्तुत हो जाने के उपरांत यह निर्धारण किया जाएगा कि वाद और प्रतिवाद में तथ्य और विधि के कौन से विवादित बिंदु हैं और किस बिन्दु को किस पक्षकार को साबित करना है। प्रत्येक पक्षकार को उस के द्वारा साबित किए जाने वाले बिन्दु पर साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। अंत में दोनों पक्षों के तर्क सुन कर निर्णय कर दिया जाएगा। यहाँ पर्याप्त साक्ष्य न होने पर दावा खारिज भी किया जा सकता है और पर्याप्त साक्ष्य होने पर मंजूर किया जा कर हर्जाना और उस के साथ न्यायालय का खर्च भी दिलाया जा सकता है।
         उक्त विवरण के बाद भी एक बात स्मरण रखें कि हमारी न्याय व्यवस्था में वकील का बहुत महत्व है। उस के बिना शायद ही कोई मुकदमा ठीक से लड़ा जा सकता हो। 

साभार - दिनेशराय द्विवेदी जी,
http://teesarakhamba.blogspot.com/ 

बुधवार, 22 जून 2011

उधार चुका देने पर भी चैक न लौटाने पर क्या करें?

मैं बहुत मुश्किल में था। मैंने एक व्यक्ति से उधार लिया था और चैक दिया था। उसे पुरे पैसे देने के बावजूद वह मेरा चैक वापस नहीं किया है और बाउंस करने की धमकी दे रहा है। उसकी नियत ख़राब हो गयी है. लेनदेन की कोई लिखत कोई रसीद नहीं है। मेरी तरह  और भी बहुत से पीड़ित होंगे जिन्हें ये परेशानी होगी. अतः मैंने अपने गुरु श्री  दिनेशराय द्विवेदी, वकील, कानूनी सलाहकार जो की कोटा, राजस्थान से है. उन्होंने मुझे मार्ग दर्शन बहुत ही अच्छे तरह से दिया है. आप सभी भी इनके मार्ग दर्शन का लाभ ले. इसकेलिए मान्यवर का शुक्रिया जिन्होंने इतने अच्छी तरह से जानकारी दी है-

बंटी जी,
आप ने उधार लिया और उसे चुकाने को चैक दिया, दोनों ने कोई गलती नहीं की। आप ने उधार लिया और चैक दे कर रकम चुका दी, बात यहीं खत्म हो चुकी थी। दोनों के बीच कोई लेन-देन शेष ही नहीं रहा था। आप पर कोई कर्ज था ही नहीं लेकिन आप ने उसे दुबारा उसी कर्ज को जो चैक से चुकाया जा चुका था चुकाने के लिए नकद रकम उसे दे दी। इस तरह उक्त व्यक्ति ने आप से दो बार धनराशि वसूल कर ली। जब आप दुबारा नकद राशि दे रहे थे तो या पहले चैक वापस लेना चाहिए था या फिर उस की रसीद लेनी चाहिए थी। गलती आप की है।
आप जो यह कह रहे हैं कि मैं चैक चोरी करने की रिपोर्ट दर्ज करवा सकता हूँ क्या? आप का यह कथन बिलकुल मिथ्या है। आप ऐसा नहीं कर सकते। यदि करते हैं तो उलटे पुलिस आप को एक मिथ्या रिपोर्ट देने के मामले में फँसा सकती है।
चैक से संबंधित कानून धारा 138 अपरक्राम्य विलेख अधिनियम में यह प्रावधान है कि यदि किसी ने किसी को चैक दिया है तो न्यायालय को प्रथम दृष्टया यह मानना होगा कि चैक किसी न किसी दायित्व के अधीन दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि चैक दायित्व के अधीन नहीं दिया गया है तो ऐसा उस व्यक्ति को साबित करना होगा। आप के मामले में आपने चैक दायित्व के अधीन ही दिया था। गड़बड़ी यह हुई है कि आप जिस दायित्व से चैक दे कर मुक्त हो चुके थे वही दायित्व आप ने दुबारा चुका दिया है। वह व्यक्ति आप को चैक बैंक में लगा कर धारा 138 का मुकदमा लगाने की बात कह रहा है वह अपराध कर रहा है।
आप मुसीबत से बच सकते हैं, लेकिन उस के लिए आप को उस व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट करवानी होगी  कि उस व्यक्ति ने यह कह कर कि वह आप का चैक आप को लौटा देगा, आप से नकद रुपया प्राप्त कर लिया और अब चैक नहीं दे रहा है। लेकिन आप के पास यह प्रमाणित करने को सबूत चाहिए कि आप ने उसे उस का रुपया चुका दिया है। यदि आप किसी प्रत्यक्षदर्शी साक्षी के माध्यम से यह साबित कर सकते हैं कि आप ने उस का रुपया चुका दिया है तो आप ऐसी रिपोर्ट करवा सकते हैं। उस पर पुलिस को कार्यवाही करनी होगी। यदि पुलिस कार्यवाही नहीं करती है तो आप एस.पी. को अपनी रिपोर्ट दें और एस.पी. को रिपोर्ट देने पर भी कार्यवाही नहीं होती है तो इस मामले में न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर वहाँ अपने और अपने साक्षी के बयान करवा कर  न्यायालय को प्रसंज्ञान लेने का निवेदन करें।

बुधवार, 15 जून 2011

छोटी मोटी समस्याएं आगे चलकर गंभीर समस्या बन जाती हैं

तेलीबांधा तालाब सौन्दर्यीकरण से प्रभावित नागरिको को अस्थाई बोरियाकला हाऊसिंग बोर्ड कालोनी मे विस्थापित किया गया। शासन, प्रशासन, नगर निगम को इतनी जल्दी थी की आधे अधुरे, अपुर्ण फ्लैट के बावजूद सभी प्रभावितों को आबंटन कर दिया गया और बस यही आश्वासन दिया गया कि सभी अधुरे कार्य को मूलभूत समस्याओं को जल्द ही पूर्ण किया जायेगा। जिसमें बिजली, पानी, आवागम, फ्लैट के बचत कार्य इत्यादि। रहते रहते बहुत सी छोटी-मोटी समस्याएं आती ही रहेंगी। परन्तु आवागमन हेतु वाहन व्यवस्था सिटी बस पुर्नवास तक करने के लिए कहा गया था और यह भी कहा गया की प्रत्येक माह सिटी बस पास को नवीनीकरण किया जायेगा। परन्तु दिनांक 25.05.2011 को एक माह पूरा होने पर अब सिटी बस संचालक द्वारा बस का किराया लिया जा रहा हैं।
बोरियाकला से प्रभावित नौकरी, अपने कार्य करने, महिलाएं घरों में काम करने शहर आना होता है। उन्हें मासिक 1,000 रू. से लेकर 1500 रू. मिलता है जो कि बस का किराया 600 रू. देने पर 400 रू. हाथों में बचता है। जिससे आम आदमी अपना गुजर बसर कैसे कर सकता हैं। सरकार द्वारा जब मकानों को तोड़ना था तो प्रभावितों को बहुत से लुभावने वादें किये गये थे और जब मकानों को तोड़ दिया गया तब अपने वादों से मुहं फेरा जा रहा है। बस यही कहा जा रहा है की मंत्री जी देखेगें, अधिकारी देखेगा इत्यादि।
इसी प्रकार से और भी मूलभूत समस्याएं है। विस्थापित किये गये फ्लैट के पीछे खाली छोड़े गये जगह पर ऊपर से ओवरफ्लो का पानी गिरता है। नाली की व्यवस्था ना होने के कारण पीछे गंदगी बहुत अधिक हो गई है और नीचे रहने वालों के घरों में किड़े, मकड़े, मच्छर आदि घुस रहे है। शिकायत करने पर कार्य चल रहा है दिखाने के लिए थोड़ा सा मलबा डाल दिया गया था जो कार्य चालू ना करने की वजह से वहीं जम गया। जब यह हाल अभी से है तो आने वाले बरसात के समय क्या होगा। यदि इसका जल्द ही निराकरण नही किया जायेगा तो आगे चलकर गंभीर परिणाम हो सकती हैं।
जब प्रभावितों को विस्थापित किया जा रहा था तो शासन प्रशासन द्वारा डॉ. की व्यवस्था किया गया था। परन्तु 15 दिन बाद ना तो वह डॉ. दिखा ना ही नगर निगम के कोई अधिकारीगण। 2 दिन पहले की बात है 1 बच्ची की हालत खराब हो गई थी उसे पास के डॉ. के पास लिया गया परन्तु डॉ. नही मिला, उसके घर जाने पर भी नही मिला। आखिर में रायपुर शहर ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी प्रकार से यदि समय पर मरीज को नही लाया जाता तो कौन जिम्मेदार होता।
एक मरीज है जिसके आगे पीछे कोई नही है बस एक मां है। मरीज उठ बैठ नही सकता देखभाल मां के द्वारा किया जाता है। रायपुर में उसकी मां घर के पास ही घरो मे काम करके अपने और अपने बच्चे का पेट भरती थी परन्तु यहां आने के बाद उसका क्या हाल है वहीं जानें। माननीय मंत्री जी को बताने पर उन्होने अधिकारी को देखने कहा था परन्तु मंत्री के सामने अधिकारी ने हां किया मंत्री जाने के बाद आज तक उस अधिकारी का पता ही नही।
शासन, प्रशासन द्वारा बहुत ही अच्छा कार्य किया जा रहा है। परन्तु प्रभावितों की छोटी मोटी मूलभूत समस्याएं है। जिसे आसानी से पूरा किया जा सकता है। यदि यह समस्या पूरा नही हो पा रहा है तो कहीं ना कहीं, किसी ना किसी तरह से कोई तो कमी है। जिसे नगर निगम द्वारा नजर अंदाज किया जा रहा है।
यहीं छोटी मोटी समस्याएं आगे चलकर गंभीर समस्या बन जाती हैं।

शुक्रवार, 10 जून 2011

बोरियाकला अस्थाई व्यवस्थापित निवासी संघ

''बोरियाकला अस्थाई व्यवस्थापित निवासी संघ'' ने महापौर से मिलकर अपनी निम्नलिखित मूलभूत समस्याओं के निराकरण हेतु ज्ञापन सौपा -
1-     तेलीबांधा तालाब सौन्दर्यीकरण से प्रभावित नागरिकों के लिए प्रभावित स्थल पर बी.एस.यू.पी. योजना के तहत् बनाये जाने वाले मकानों का जल्द निर्माण किया जावें। जिससे निश्चित समयावधि में प्रभावितों का पुर्नव्यवस्थापन हो सकें।
2-     नगर निगम के मकान सर्वे सूची में जिनके नाम त्रुटि के कारण बटांकन में दर्शित/ उल्लेखित है एवं जिनके नाम सर्वे सूची में सूचीबध नहीं है। के प्रकरणों पर मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए, सहानुभुति पूर्वक विचार किया जाकर आर्थिक बोझ से दबे तथा मकान के लिए भटक रहे परिवारों को अविलंब मकान आबंटित किया जावे।
3-     कृछ ही दिनों पश्चात नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने जा रहा है, परंतु प्रशासन द्वारा विस्थापितों के बच्चों के शिक्षा हेतु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा हैं। जिसके कारण बच्चों की शिक्षा दिक्षा में बाधा उत्पन्न होगी। जिसे शासन-प्रशासन द्वारा शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था किया जाना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा ग्रहण में किसी प्रकार का बाधा उत्पन्न न हो।
4-     वर्षा ऋतृ के आवगम के पूर्व विस्थापित स्थल पर स्थाई अस्पताल की व्यवस्था की जावें जिससे वर्षाकाल में होने वाली विभिन्न बिमारियों से रोकथाम हो सकें तथा कोई विस्थापित नागरिक किसी गंभीर रोग से ग्रसित ना हो।
5-     प्रशासन द्वारा विस्थापितों के आवागमन हेतु सिटी बस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, परन्तु यह सुविधा प्रयाप्त नहीं हैं। सिटी बस निशुल्क पास सुविधा पुर्नव्यवस्थापन तक के लिए जारी किये जाने की घोषणा की गई थी। जिसे एक माह के लिए जारी किया गया था जो दिनांक 25/05/2011 को समाप्त हो गया जिसे पुन: नवीनीकरण किया जावें। जिससे निश्चित समयों में निरंतर सिटी बस की सुविधा प्रदान की जावें तथा प्रतिदिन जीवन यापन हेतु शहर आने वाले आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिल सकें।
6-     बोरियकला हाऊसिंग बोर्ड कालोनी की लचर विद्युत व्यवस्था को दुरूस्त किया जावे। जिससे वर्षा ऋतु में होने वाली असुविधा से बचा जा सकें।
7-     शासन-प्रशासन द्वारा विस्थापित स्थल पर प्रभावितों के शिकायतों के निराकरण के लिए समय समय पर जन शिकायत निवारण शिविरों का आयोजन रखी जावें। जिससे प्रभावितों के मूलभूत समस्याओं से शासन-प्रशासन अवगत हो, समस्याओं के निराकरण में त्वरित कार्यवाही कि जा सकें।
       महापौर महोदया ने इसके जवाब में आश्वासन देते हुए कहा की 23 जून को राष्टपति माननीय प्रतिभा पाटील जी आ रही है जिसके कारण निगम का अमला अभी व्यस्त हैं। आपकी समस्या का सामाधान शीघ्र किया जावेगा।
            महापौर को ज्ञापन सौपने संघ के अध्यक्ष धनेश्वर लहरी, सचिव पार्थव माेंगराज, उपाध्यक्ष बबला मरकाम, कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार, सह कोषाध्यक्ष बंटी निहाल, संगठन सचिव, गिरधारी नायक, भास्कर नायक, मनोहर निहाल आदि उपस्थित थे।  

सोमवार, 30 मई 2011

तेलीबांधा प्रोजेक्ट पर तलवार


                रायपुर.नगर निगम के ड्रीम प्रोजेक्ट तेलीबांधा में 5 मकानों को खाली कराकर जमींदोज करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा। अदालती आदेश मकान मालिकों के हक में आने के बाद निगम का पूरा प्रोजेक्ट ही लंबित हो जाएगा। 
             निगम इस कवायद में था कि एक साल के भीतर प्रोजेक्ट के 720 मकान बनाकर बोरियाकला में विस्थापितों को पुनर्वासित कर दिया जाए। मगर हाईकोर्ट से मिले स्टे के बाद प्रोजेक्ट साल भर के अंदर किसी भी हालत में पूरा नहीं हो सकता है। ये पांचों मकान प्रोजेक्ट के बीचोबीच अवरोध बनकर खड़े रहेंगे।              तत्कालीन कमिश्नर ओपी चौधरी ने राजीव आश्रय योजना के पट्टों को निरस्त करने के लिए दो महीने पहले ही जिला प्रशासन को पूरा प्लान बनाकर दे दिया था। मगर पट्टे 4 अप्रैल के आसपास ही निरस्त हो सके। जिला प्रशासन ने आनन-फानन में 160 पट्टों को निरस्त किया। मगर नजूल के स्थाई पट्टों को निरस्त करने में जिला प्रशासन से चूक हो गई। अफसरों का कहना है कि पांचों मकान मालिकों को 30 साल की स्थायी लीज मिली हुई थी। स्थायी लीज होने के कारण कलेक्टर भी इन्हें निरस्त नहीं कर सके। कानून के जानकारों के मुताबिक दो ही स्थिति में निगम पट्टों को निरस्त करा सकता है। 
                पहला आपसी सहमति के बाद मुआवजा दे दिया जाए या फिर पांचों मकान मालिकों का उचित विस्थापन किया जाए।

तालाब के अंदर के पट्टे कैसे मिले - 
तेलीबांधा में झुग्गी झोपड़ी तोड़ने के बाद अफसर इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर तालाब के पानी के अंदर बनी झोपड़ियों के पट्टे कैसे दे दिए गए। जिस वक्त पट्टे दिए गए उसकी अगर जांच की जाए तो बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है।

बिना अनुमति बना लिए भवन - 
तेलीबांधा के आसपास बनी झुग्गी झोपड़ी वालों ने शानदार व आलीशान मकान केवल पट्टे खरीदकर ही बना लिए। अधिकांश केस में निगम से किसी भी का मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया। जितने भी मकान तोड़े गए उसमें से किसी ने भी मकान बनाने की अनुमति नहीं ली थी।

प्रोजेक्ट में थे दो तरह के पट्टे  - 
कलेक्टर डा. रोहित यादव ने बताया कि नगर निगम ने तेलीबांधा की झुग्गी झोपड़ी के व्यवस्थापन को राजीव आश्रय योजना में लिया था। उसके तहत 160 पट्टों को निरस्त करने की लिस्ट बनाकर दी गई थी। मगर इसके अलावा भी कुछ पट्टे नजूल लैंड की फ्री होल्ड पर थी। 
          इसका 30 साल का स्थाई पट्टा था। पट्टा धारी बाकायदा भू-भाटक भी देता रहा है। आपसी सहमति व मुआवजे के बाद ही इन पट्टों को निरस्त किया जा सकता था। वो अधिकार क्षेत्र के बाहर था। इसलिए पट्टे निरस्त नहीं किए गए।
          "कोर्ट के निर्णय के बाद ही पांच मकानों पर निर्णय लिया जाएगा। पांच मकानों को छोड़ दिया गया है। बाकी सभी मकानों को खाली कराकर तोड़ा जा रहा है।" 
तारण सिन्हा, अतिरिक्त कमिश्नर 


केविएट के बाद भी स्थाई पट्टे पर - "स्टे इसलिए मिला क्योंकि इन्हें निरस्त नहीं किया गया। प्रोजेक्ट से पहले अगर इन्हें निरस्त कर दिया जाता तो स्टे नहीं हो पाता।" 
पंकज अग्रवाल, 



वकील तय नहीं कर पा रहे क्या-क्या करेंगे - तेलीबांधा प्रोजेक्ट के तहत पूरी बस्ती को जमींदोज कर करने के बाद भी निगम इस प्रोजेक्ट का फूल प्रूफ प्लान नहीं बना सका है। हर दूसरे दिन कोई न कोई नई योजना की घोषणा की जा रही है। यानी अब तक तय नहीं हुआ है कि प्रोजेक्ट किस स्वरूप में आकार लेगा, जबकि 650 परिवारों का आशियाना उजड़ चुका है।

              शुक्रवार को निगम ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट में तालाब के आकार को शामिल कर लिया। पांच दिन की तोडफ़ोड़ के बाद यह घोषणा की गई कि तालाब को दिल के आकार का शेप दिया जाएगा। ऊंची मंजिल से देखने पर वह दिल का नमूना नजर आएगा। 
              तालाब को इस नए शेप में ढालने के लिए जीई रोड वाले तालाब के किनारे स्थित आरडीए के कांप्लेक्स और पिंड बलूची रेस्टोरेंट को भी तोड़ा जाएगा। इन भवनों को तोड़ने के बाद खाली होने वाली जमीन तालाब में शामिल की जाएगी। अभी तक यह निगम के प्लान में नहीं था। इसी तरह तालाब के एक हिस्से में स्थित नेत्र चिकित्सालय के गार्डन का हिस्सा भी प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया जाएगा।


तालाब का पार बढ़ेगा - तेलीबांधा प्रोजेक्ट बनने के बाद तालाब का पार बढ़ जाएगा। तालाब 16 हेक्टेयर में था। इसमें से अभी तालाब का पानी 11 हेक्टेयर में बचा है। अतिक्रमण हटने के बाद 5 हेक्टेयर की जमीन 

खाली कराई गई है। 4 हेक्टेयर की जमीन यानी 10 एकड़ के लगभग जमीन पर प्रोजेक्ट को लाया जा रहा है। खाली हो रही जमीन में से ढाई से तीन एकड़ तालाब बढ़ जाएगा। 

          12 हेक्टेयर वाटर बाडी के बाद रिटेनिंग वाल बनाई जाएगी। 4 हेक्टेयर के हिस्से में तीन किमी का पाथ वे, गार्डन, पार्किग स्पेस, फूड जोन, कामर्शियल कांप्लेक्स, सामुदायिक भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व मंदिर बनाने का प्लान है।


वर्क आर्डर में देरी - बस्ती खाली होने के बाद वर्क आर्डर जारी किया जाना था। मगर प्लान तैयार नहीं हुआ है इसलिए वर्क आर्डर जारी करने में काफी देरी होने के संकेत मिल रहे हैं।



वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट- तालाब के किनारे वाले हिस्सों में वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट भी बनाया जाएगा। साथ ही तालाब के अंदर की मिट्टी को निकालकर गहरीकरण भी किया जाएगा। इसके लिए 12 करोड़ रुपए का अलग से प्रावधान किया गया है।

             "तालाब को दिल का आकार देने की कोशिश है। पाथ वे 3 किमी का बनाया जाएगा। जल विहार कालोनी के दोनों गार्डनों को पाथ वे से जोड़ दिया जाएगा। प्रोजेक्ट को सही स्वरूप देने के लिए जीई रोड के कुछ  हिस्सों में भी तोडफ़ोड़ की जाएगी।"  
किरणमयी नायक, महापौर


प्रोजेक्ट कास्ट- 24 करोड़ 36 लाख 

>टेंडर कास्ट 24 करोड़ 35 लाख। 
>एक मकान की कीमत- तीन लाख 36 हजार। 
>अधोसंरचना मद में सड़क, पानी, बिजली व ओवरहेड टैंक के पीछे एक मकान पर 70 हजार होंगे खर्च। 
>एक मकान बनेगा 2 लाख 64 हजार में। 
>ओमनी इंफ्रास्ट्रक्चर व सीनटेक्स ने डाला था टेंडर। 
>ओमनी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला टेंडर। 
>दोनों कांट्रेक्ट में था एक करोड़ का अंतर। 
>चार बार हुआ टेंडर का नेगोशियेशन 

सौजन्य - दैनिक भास्कर, रायपुर 

शनिवार, 28 मई 2011

सुचारू व्यवस्था की मांग.


रायपुर. हरिभुमि. बोरियाकला में विस्थापित रहवासियों की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गुरूवारा को चली अंधड  में विधूत व्यवस्था ठप हो गई। निवासियों को जल एवं विधुत आपुर्ति नही होने पर भारी परेशानी का सामना कर। बोरियाकला अस्थाई निवासी संघ के अध्यक्ष धनेश्वर लहरी ने बताया की निगम प्रशासन ने हाऊसिंग बोर्ड का कार्य पूर्ण किये बैगर ब्यवस्थापन कर दिया गया। संघ ने नगरीय प्रशासन मंत्री, महापौर, जिलाधीश  एवं निगम आयुक्त से समस्याओं के निराकरण के लिए मांग की है। सौजन्य - हरिभूमि समाचार पत्र 

.........तो उग्र आंदोलन करेंगे विस्थापित

रायपुर. नवभारत समाचार. तेलीबांधा प्रोजेक्ट के कारण विस्थापित किये गये सैंकड़ों परिवारों की ओर से बोरियाकला अस्थ्ज्ञायी विस्थापित निवासी संघ ने महापौर डा. किरणमयी नायक से अपना वादा पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है. संघ ने कहा कि अब तक नागरिकों ने नगर निगम एवं जिला प्रच्चासन को हर कदम पर सहयोग दिया हैं। कहीं ऐसा न हो कि नागरिक उग्र आंदोलन करने बाध्य हो जायें। 
संघ के अध्यक्ष धनेश्वर लहरी ने कहा कि तालाब के किनारे बसी तीन बस्तियों के सैकड़ों  परिवारों को महापौर ने अच्छी आवास व्यवस्था देने का बीड ा उठाया है। जिसमें किसी प्रकार की राजनीति, छल-कपट एवं गुमराह करने की स्थिति निर्मित नहीं होने देने का वादा महापौर ने किया है। प्रभावितों के साथ महापौर ने कई बार बैठक की। प्रत्येक बिन्दुओं पर योजना की जानकारी दी गई। प्रभावितों ने महापौर व जिला प्रच्चासन के अफसरों को पूरा सहयोग दिया। बोरियाकला में आर्थिक बोझ बढ ने और असुरक्षा के बीच भी लोग रहने तैयार हो गये। जिंदगी भर की मेहनत से बनाये गये घर को टूटता देखने के बाद वे व्यवस्थापन का दंश  झेल रहे हैं। इस उम्मीद में कि वादे के मुताबिक एक साल में योजना के मुताबिक आवास मिलेगा। किन्तु विभिन्न प्रकार के भ्रामक समाचारों से विस्थापितों को संदेह होने लगा है। संघ ने मांग की कि जल्द ही तेलीबांधा प्रोजेक्ट का काम तेज करें, अन्यथा शांतिपूर्ण सहयोग देने वाले उग्र कदम उठाने बाध्य होंगे। सौजन्य - नवभारत  समाचार पत्र 


बदइंतजामी से जूझ रहे तेलीबॉंधा विस्थापित


          रायपुर (निप्र)। तेलीबांधा तालाब से विस्थापित होकर गए बोरियाकला गए लोग अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। नई जगह में पानी, बिजली और साफ-सफाई का अभाव है। शहर तक आने-जाने में लोगों के ४० से ६० खर्च हो रहे हैं। तेलीबांधा से जलविहार, उत्कल बस्ती, गंगानगर, सुभाषनगर के तकरीबन ८०० परिवारों को बोरियाकला में शिफ्ट किया गया। शिफ्टिंग के दौरान कई तरह से सुविधाएं देने की बात भी की गई थी, मगर आज तक सुविधाओं से लोग महरूम हैं। धनेश्वरी लहरी ने बताया कि आंधी से बिजली लाइन बंद हो गई है, मगर ३० घंटे बाद भी इसको सुधारा नहीं गया है।
          किसी का अहित नहीं होगाः निगम सभापति संजय श्रीवास्तव ने तेलीबांॅधा योजना का निरीक्षण करते हुए जनता का आश्वस्त किया है कि उनका किसी भी प्रकार से अहित नहीं होगा। शुक्रवार को देवारबस्ती, सुभाषनगर के लोगों ने उन्हें समस्याओं को लेकर अवगत कराया। सभापति ने निगम एवं जिला प्रशासन के साथ तेलीबांॅधा में तो़ड़फो़ड़ के बाद सकारात्मक रूप से इसके विकास की बात कही। उन्होंने कहा कि खाली जमीन का सर्वे कर निगम और सरकार तालाब का  सीमांकन कराएगी। - सौजन्य - नईदुनिया समाचार पत्र 

गुरुवार, 26 मई 2011

१ रू., २ रू. चांवल, शराब में दी गई सब्सीडी है।



गरीबों को १ रू., २ रू. किलो में दिया गया चांवल दरअसल सरकार द्वारा शराब में दी गई सब्सीडी है। -               छ.ग. में जनता को सार्वजनिक चांवल वितरण प्रणाली से १ रू. तथा २ रू. प्रति किलो के हिसाब से प्रति व्यक्ति १७ किलो चांवल दिया जाता है। ऐसा कर छ.ग. सरकार ने पूरे देश में वाहवाही हासिल की है। यह बात बहुत अच्छी सोच के साथ शुरू किया गया था परंतु इसका गरीब तबको में बहुत अधिक बुरा असर हुआ है। दरअसल केन्द्र की नरेगा योजना के तहत प्रत्येक गरीब व्यक्ति को न्यूनतम दर से १०० दिन प्रति वर्ष कार्य दिया जाता है जो कि महीने में कम से कम १० दिन तो हो ही जाता है।
                इसके अतिरिक्त वे बचत पूरे माह किसी ना किसी कार्य में लगाकर पैसा कमाने की कोशीश करते हैं। जो चांवल पहले उन्हें ३५० रूपये में मिलता था वह अब केवल ३४ रूपये में मिलता है। इस प्रकार से जो बचने वाला पैसा है उसका उपयोग उनके द्वारा सबसे अधिक शराब पीने में हो रहा है। लेवर कम काम कर शराब पर पैसा अधिक खर्च कर रहा है। यदि गहराई में जाये तो ऐसा लगेगा कि छ.ग. सरकार द्वारा चांवल में सब्सीडी नही बल्कि शराब में सब्सीडी दे रही है। - बंटी निहाल, रायपुर छ.ग.