रायपुर। तेलीबांधा तालाब की अब नए सिरे से नापजोख होगी। रेवेन्यू अफसरों से वर्तमान रकबे का पूरा सीमांकन करने के बाद पूरी जानकारी देने को कहा गया है। पुराने रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार तालाब 35 एकड़ में था। अब इसके आधे से कम हिस्से में ही तालाब बचा है।
कलेक्टर डा. रोहित यादव ने एसडीएम तारन प्रकाश सिन्हा से इलाके के सारे पटवारियों को तालाब के पूरे रकबे की मौके पर जाकर लैंड रिकार्ड के साथ जांच करवाने के आदेश दे दिए हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट दो दिन के अंदर तैयार करने को कहा है। अफसरों से यह भी कहा गया है कि वे अपने साथ पुराने लैंड रिकार्ड की कापी लेकर जाएं। उस आधार पर वर्तमान में तालाब के पानी की जमीन, निस्तारी की जमीन और बची घास जमीन की पूरी जानकारी तैयार करें। नापजोख के सारे रिकार्ड की जानकारी तैयार होने के बाद ही निगम के द्वारा मांगी जा रही जमीन पर निर्णय होगा। उल्लेखनीय है कि तेलीबांधा तालाब सौंदर्यीकरण और इनसीटू प्रोजेक्ट के तहत तालाब के किनारे बनने वाले मकानों के लिए रेवेन्यू डिपार्टमेंट से जमीन का अलाटमेंट नगर निगम को होना है।
ये वही जमीन है जहां से छह महीने पहले तेलीबांधा बस्ती को बोरियाकला में शिफ्ट कराने के बाद खाली कराया गया। 12 एकड़ की वाटर बाडी के बाद खाली कराई गई बस्ती में से 6 एकड़ जमीन निकली है। इसमें से 2 एकड़ जमीन निगम मकान बनाने के लिए मांग रहा है। मगर जनवरी 2011 के जगपाल सिंह वर्सेस स्टेट आफ पंजाब के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए गए निर्देश के बाद तालाब के पानी और निस्तार की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण न करने के निर्देश दिए गए थे। उसके बाद से ही तेलीबांधा तालाब सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट पर प्रश्न चिन्ह लगना शुरू हुआ।
निर्णय आने के बाद खाली हुई बस्ती : गौर करने वाली बात यह है कि जगपाल सिंह वर्सेस स्टेट आफ पंजाब का फैसला जनवरी में आ गया था। इसके तत्काल बाद राज्य शासन को तालाब की जमीन पर निर्माण नहीं करने के निर्देश भी दे दिए गए। मगर राज्य शासन और निगम प्रशासन ने अप्रैल के अंत में तेलीबांधा बस्ती के लोगों के पट्टों को निरस्त करके उन्हें इस वादे के साथ बोरियाकला शिफ्ट किया कि उन्हें दोबारा तालाब के किनारे खाली हुई जमीन पर ही मकान बनाकर दिए जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि जब शासन व प्रशासन को इस बात का पता था कि खाली होने वाली जमीन पर मकान नहीं बनाए जा सकते तो बस्ती वालों के साथ लिखित में करार किस आधार पर किया गया।
साढ़े चौबीस करोड़ के मकान : तेलीबांधा तालाब के किनारे बनने वाले राज्य के पहले इनसीटू प्रोजेक्ट के तहत कुल 720 मकान बनाए जाने हैं। ये मकान 24 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपए की लागत से बनने हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 80 फीसदी, राज्य सरकार ने दस फीसदी और नगर निगम ने दस फीसदी राशि अलाट की है। बनने वाले एक मकान की लागत 3 लाख 39 हजार रुपए आ रही है। इसका दस फीसदी हिस्सा मकान बनने के बाद बस्ती वालों से लिया जाना है। ये दस फीसदी हिस्से का शेयर नगर निगम मकान निर्माण के पहले लगा रहा है।
तालाब का कुल रकबा 35 एकड़ से ज्यादा
> 1929-30 के लैंड रिकार्ड के मुताबिक तालाब का कुल रकबा 35 एकड़ से ज्यादा।
> उस लैंड रिकार्ड के मुताबिक जीई रोड की गौरवपथ की सड़क भी तालाब की जमीन।
> जलविहार कालोनी की सड़क, गार्डन, आरडीए कांप्लेक्स और लायंस क्लब का हाल भी पानी के अंदर की जमीन पर बना है।
> वर्तमान में केवल 12 एकड़ हिस्से में वाटर बाडी बची है।
> बस्ती को खाली कराने के बाद 6 एकड़ की अतिरिक्त जमीन निकली।
> चार एकड़ जमीन में तालाब की वाटर बाडी को बढ़ाने की योजना।
> 2 एकड़ जमीन पर सौंदर्यीकरण और मकान बनाने की योजना।
तेलीबांधा तालाब का नए सिरे से नापजोख कराया जा रहा है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट से कहा गया है कि इलाके के सारे पटवारी और आरआई को नापजोख में लगा दिया जाए। उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रोहित यादव, कलेक्टर
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सोमवार, 28 नवंबर 2011
शनिवार, 9 जुलाई 2011
जनता बहुत चलाक है.
तेलीबांधा तालाब सौन्दर्यीकरण से प्रभावित नागरिको को अस्थाई बोरियाकला हाऊसिंग बोर्ड कालोनी मे विस्थापित किया गया है. प्रभावित नौकरी, अपने कार्य करने रायपुर शहर लगभग १३ किलोमीटर आना जाना होता है। इसके लिए शासन द्वारा २ सिटी बस सुबह ८.०० बजे और ९.३० बजे आती है. परन्तु वहां की जनता जो लगभग ४००० परिवार है उन्हें २ सिटी बस ( क्षमता लगभग ४० से ५० सीटर ) से क्या होने वाला ? इसलिए हमारे यहाँ के ऑटो रिक्शा चालक भाइयो की निकल पड़ी. लगभग एक माह तक बहुत ही अच्छी कमाई होने लगी. फिर क्या था बहुतो को कमाने का चस्का लगा और देखते-देखते लगभग ३० से ४० ऑटो आ गये. किसी ने उधार, तो किसी ने सोना बेचा और ऑटो ले लिया. लगता है की आने वाले सालों में ऑटो की संख्या और बढेगी.
यहाँ की जनता भी उतनी ही चलाक है. ऑटो में बैठती है मगर जैसे ही सिटी बस आती है. उठकर बस में चले जाते है, जाते भी क्यों न ( पास जो बना था २ माह का) हमेशा ऐसा बार-बार करने पर एक ऑटो वाले को गुस्सा आ गया उसने सवारी को बोल दिया, अगली बार मेरे ऑटो में मत बैठना बस से ही आना जाना करना. जो समझदार था वो तो चुपचाप बैठ गया परन्तु जो जिद्दी थे, वो बस में चले गए. समझदार व्यक्ति करता भी क्या ?सरकारी बस कब तक साथ देगा. कभी-कभी बस आता ही नहीं, ऐसे में खतरा मोल नहीं ले सकता था. आखिर ऑटो वाला अपना ही मोहल्ले का है.
''बोरियाकला अस्थाई व्यवस्थापित निवासी संघ'' ने कालोनी में विभिन्न समस्याओ के निराकरण के लिए महापौर को बुला कर दिखाने का निर्णय लिया और प्रतीनिधियो द्वारा महापौर से समय लेने के लिए कार्यालय पहुंचे और पार्षद महोदय का इन्तजार करने लगे. पार्षद नहीं आने पर अध्यक्ष द्वारा उन्हें फोन करने पर, पार्षद ने रास्ते में हूँ कहा. इसी प्रकार ३ से ४ बार फोन करने पर वही जवाब मिलता. फिर पता चला की महापौर महोदय का गाड़ी लग रहा है उन्हें निकलना है. हमने पार्षद का इन्तजार ख़त्म कर महापौर श्रीमती किरणमयी नायक के कार्यालय में गए. और सविनय निवेदन किया की एक बार आप बोरियाकला आकर हमारे समस्या को देखे.
महापौर ने पार्षद जी को फोन लगाया और कहा मैं पार्षद जी के साथ ही आउंगी ( अकेले आये भी कैसे जनता नाराज जो थी उनसे, जनता के आक्रोश के डर के कारण अकेले नहीं आना चाहती है.) फिर उन्होंने पूछा कब आना है ?
अध्यक्ष श्री धनेश्वर लहरी ने कहा- मैडम हमारे यहाँ के सभी जनता अपने अपने कार्य में व्यस्त रहते है उन्हें बस रविवार को ही समय मिलता है. आप यदि रविवार को आएँगी तो सभी के सामने चर्चाये हो जाएँगी, आपकी कृपा होगी.
उन्होंने कहा - ठीक है, मैं रविवार को आउंगी, क्या प्रोग्राम है आप लोगो का ?
संघ के सचिव श्री पार्थो राव मोगराज जी ने कहा - मैडम आप हमारी परिवार की सदस्य है. हम कुछ नहीं कर सकते, बस हमारे पास जो कुछ मिलेगा उसी से, कम से कम एक गिलास पानी तो जरुर पिला सकते है.
महापौर मुस्कुराते हुए बोली- हां जरुर.
फिर सभी सदस्य हसते हुए ख़ुशी- ख़ुशी बहार निकले. पार्षद महोदय अभी तक नहीं पहुँच पाए थे. उन्हें फ़ोन लगाया परन्तु फ़ोन नहीं लगा. हम सभी जोरो सोरो से तयारी में भीड़ गए. फिर पार्षद जी का फोन आया उन्होंने कहा की महापौर जी रविवार को नहीं आ पाएंगी. उनका दूसरा प्रोग्राम बन गया है. उन्हें जगनाथ मंदिर, सीएम और राज्यपाल के प्रोग्राम में जाना है. फिर क्या था हम सभी को गुस्सा आने लगा. सभी तैयारिया पूरी हो चुकी थी. आगे के बारे में अगले अंक में विस्तार से लिखूंगा........धन्यवाद
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